मिलावटखोरों की कौम इन्सानी कौम पर एक काला धब्बा है , गन्दे और कुत्सित व्यापार के नाम पर मौत बांटने वाले यह लोग सीधे फांसी पर चढ़ाए जाने चाहिए । हमारे शासन के पास मिलावटी वस्तुओं की जांच करने के लिए कोई वैज्ञानिक सम्मत विश्वसनीय लैबोरेट्रीयां नहीं है और जांच में भी सालों साल लग जाते हैं और मिलावटखोर कानून के पंजे से बच जाते हैं । मिलावटखोरों ने भी हद कर दी है , बच्चों के द्वारा खाई जाने वाली आलू की चिप्स में भी एसिड की मिलावट । लालच और पैसे की भूख ने इन मिलावटखोरों को हैवान बना दिया है । अब किससे कहें क्या कहें । मुरैना जैसे शहर में नकली दुध बनाया जाता है वहां नकली मिलावटी पनीर , नकली मीलावटी मावा धड़ल्ले से आदमी बन रहा है । दिखावे के लिए पुलिस एक दो छापे लगा देती है परंतु फिर वही ढाक के तीन पात । क्यों इस महामारी का पक्का इलाज नहीं किया जाता । यह अमानुषिकता की पराकाष्ठा है । ऐसे लोगों को सरेआम , सरेराह शहर के चौराहे पर आम जनता के द्वारा सजा दी जानी चाहिए । पता नहीं कितने नौनिहाल कितने पुरुष , कितनी महिलाएं, इस मिलावट खोरी के कारण असमय मौत के मुंह में समा गए । आखिर इसका अंत कब होगा चंद रुपयों के लालच में भ्रष्टाचार के तन्त्र में लिप्त बिक जाने वाले चन्द शासकीय सेवक भी इस जघन्य अपराध में बराबरी के गुनहगार हैं , ये भी तत्काल सजा के लायक हैं । कोई मुकदमा नहीं , कोई जिरह नहीं , कोई गवाह पुरावे नहीं , जब मिलावटी सामान मिलावट करने की वस्तुएं है इनके गोडाउन में पाई जाती है तो यह साफ जाहिर होता है कि यह मिलावट का खतरनाक खेल खेल रहे हैं , जो समाज के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है अतः तत्काल चार्ज शीट बनाकर पन्द्रह दिनों में मुकदमे का फैसला करके इन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए । ईश्वर भी क्या करेगा जब इनका जमीर ही मर गया है । इनका जमीर , इनका अंतर्मन मन श्मशान हो चुका है । हे ईश्वर ऐसे मिलावटखोरों को , शासन के भ्रष्ट अधिकारियों को ,कानून के रखवालों , या इनकी पैरवी करने वाले वकीलों को , कभी माफ मत करना , इन्हे जीते जी रोरव नर्क की अग्नि में धीरे धीरे स्वाहा करना । किस खाद्य वस्तु में मिलावट नहीं की जाती मसालों में मिलावट , जीवन रक्षक दवाओं में मिलावट , मेहन्दी , सोन्दर्य प्रसाधनों में मिलावट , दुध , दुध से बने पदार्थों में मिलावट , देशीविदेशी शराब में मिलावट , वो कोनसी वस्तु है जो मिलावट रहित बची हो । इस मिलावट के दौर में इन्सानों की बस्ती में रहने वाले इन्सान भी मिलावटी , दोगले चरित्र वाले , कपटी , झूठे और स्वार्थी हो गयें हैं । हे ईश्वर तू अगर हैं तो इन्सानियत का समूल विनाश होने से बचा लेना । चन्द्रशेखर बिरथरे ' पथिक'
मिलावटखोरों की कौम इन्सानी कौम पर एक काला धब्बा है , गन्दे और कुत्सित व्यापार के नाम पर मौत बांटने वाले यह लोग सीधे फांसी पर चढ़ाए जाने चाहिए । हमारे शासन के पास मिलावटी वस्तुओं की जांच करने के लिए कोई वैज्ञानिक सम्मत विश्वसनीय लैबोरेट्रीयां नहीं है और जांच में भी सालों साल लग जाते हैं और मिलावटखोर कानून के पंजे से बच जाते हैं । मिलावटखोरों ने भी हद कर दी है , बच्चों के द्वारा खाई जाने वाली आलू की चिप्स में भी एसिड की मिलावट । लालच और पैसे की भूख ने इन मिलावटखोरों को हैवान बना दिया है । अब किससे कहें क्या कहें । मुरैना जैसे शहर में नकली दुध बनाया जाता है वहां नकली मिलावटी पनीर , नकली मीलावटी मावा धड़ल्ले से आदमी बन रहा है । दिखावे के लिए पुलिस एक दो छापे लगा देती है परंतु फिर वही ढाक के तीन पात । क्यों इस महामारी का पक्का इलाज नहीं किया जाता । यह अमानुषिकता की पराकाष्ठा है । ऐसे लोगों को सरेआम , सरेराह शहर के चौराहे पर आम जनता के द्वारा सजा दी जानी चाहिए । पता नहीं कितने नौनिहाल कितने पुरुष , कितनी महिलाएं, इस मिलावट खोरी के कारण असमय मौत के मुंह में समा गए । आखिर इसका अंत कब होगा चंद रुपयों के लालच में भ्रष्टाचार के तन्त्र में लिप्त बिक जाने वाले चन्द शासकीय सेवक भी इस जघन्य अपराध में बराबरी के गुनहगार हैं , ये भी तत्काल सजा के लायक हैं । कोई मुकदमा नहीं , कोई जिरह नहीं , कोई गवाह पुरावे नहीं , जब मिलावटी सामान मिलावट करने की वस्तुएं है इनके गोडाउन में पाई जाती है तो यह साफ जाहिर होता है कि यह मिलावट का खतरनाक खेल खेल रहे हैं , जो समाज के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है अतः तत्काल चार्ज शीट बनाकर पन्द्रह दिनों में मुकदमे का फैसला करके इन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए । ईश्वर भी क्या करेगा जब इनका जमीर ही मर गया है । इनका जमीर , इनका अंतर्मन मन श्मशान हो चुका है । हे ईश्वर ऐसे मिलावटखोरों को , शासन के भ्रष्ट अधिकारियों को ,कानून के रखवालों , या इनकी पैरवी करने वाले वकीलों को , कभी माफ मत करना , इन्हे जीते जी रोरव नर्क की अग्नि में धीरे धीरे स्वाहा करना । किस खाद्य वस्तु में मिलावट नहीं की जाती मसालों में मिलावट , जीवन रक्षक दवाओं में मिलावट , मेहन्दी , सोन्दर्य प्रसाधनों में मिलावट , दुध , दुध से बने पदार्थों में मिलावट , देशीविदेशी शराब में मिलावट , वो कोनसी वस्तु है जो मिलावट रहित बची हो । इस मिलावट के दौर में इन्सानों की बस्ती में रहने वाले इन्सान भी मिलावटी , दोगले चरित्र वाले , कपटी , झूठे और स्वार्थी हो गयें हैं । हे ईश्वर तू अगर हैं तो इन्सानियत का समूल विनाश होने से बचा लेना । चन्द्रशेखर बिरथरे ' पथिक'
ब्लाग कितने दुख , कष्ट और मानसिक पीड़ा की बात है कि फिर एक साल बाद कोविड के प्रकोप के कारण लाकडाउन होने से प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने लगे हैं थोड़ी सी राहत की बात यह है कि वे पैदल नहीं जा रहे हैं बल्कि उन्हें जो भी यात्रा का साधन मिल रहा है उससे वे घर लौट रहे हैं परंतु हो सकता है आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो जाए पिछली बार भी मैंने यह सुझाव दिया था कि प्रवासी मजदूरों को रहने के लिए स्थान मुहैया करवाया जाना चाहिए वे जिस भी फैक्ट्री में , कारखाने में या दुकानों में काम करते हैं उनके मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे प्रवासी मजदूरों को रहने की जगह उपलब्ध करवाएं परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ और जब मजदूरों को लगा कि रहने की बात तो छोड़ो उनके खाने-पीने की भी कोई व्यवस्था नहीं हो रही है तो वे दुखी मन से अपने गांव या घर लौटना चाह रहे हैं । यह बहुत ही चिंता का विषय है। आज भी रोजनदारी पर काम करने वाले मजदूर लावारिस ही हैं हम भले ही प्रोविडेंट फंड या ईएसआईसी की योजना देश में चला रहे हैं लेकिन धरातल पर ऐसी व्यवस्थाएं क्यों नहीं है यहां तक की रोजनदारी पर मकान बनाने के काम करने करवाने वाला ठेकेदार ...
फिल्म "छलांग " एक ब्लेक कामेडी फिल्म है जो दिनांक 13 नवम्बर 2020 के दिन प्राईम विडियो ओटीटी पर रिलिज हुई । यह एक बेहतरीन फिल्म है इसे परिवार सहित देखा जा सकता है ।फिल्म में बच्चों को खेल शिक्षा भी दीए जाने पर जोर दिया गया है । कहानी का एंबियांस है हरियाणा का झज्जर शहर जहां एक हायर सेकेंडरी स्कूल है इसमें एक गेम्स टीचर है जिसका नाम है महेंद्र (राजकुमार राव) प्यार से जिसे सब मोन्टू कहते हैं , हालांकि मोंटू की शिक्षा इसी स्कूल में हुई और स्कूल के प्रिंसिपल श्रीमती उषा गहलोत ( इला अरुण)उसके प्रति विशेष स्नेह रखती है । मोंटू के पिता जो एक वकील (सतीश कौशिक) हैं के कहने पर या की सिफारिश पर उसे गेम्स टीचर की.नौकरी पर रख लिया जाता है हालांकि मोंटू एक एथलीट्स है और शहर के लिए कहें या स्टेट के लिए दौड़ा भी है और पुरस्कृत भी किया गया है । स्कूल में मोंटू अपने हिसाब से अपने ज्ञान से बच्चों को फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं और गेम्स वगैरह सिखाते हैं परंतु उनके पास कोई वोकेशनल क्वालिफिकेशन नहीं है इसी दरमियान स्कूल में शहर की एक लड़की नीलम (नुशरत भरुचा) का कम्प्यूटर शिक्षक के पद पर अपॉइंटमे...
मिलावटों के जहर
ReplyDeleteमिलावटखोरों की कौम इन्सानी कौम पर एक काला धब्बा है , गन्दे और कुत्सित व्यापार के नाम पर मौत बांटने वाले यह लोग सीधे फांसी पर चढ़ाए जाने चाहिए । हमारे शासन के पास मिलावटी वस्तुओं की जांच करने के लिए कोई वैज्ञानिक सम्मत विश्वसनीय लैबोरेट्रीयां नहीं है और जांच में भी सालों साल लग जाते हैं और मिलावटखोर कानून के पंजे से बच जाते हैं । मिलावटखोरों ने भी हद कर दी है , बच्चों के द्वारा खाई जाने वाली आलू की चिप्स में भी एसिड की मिलावट । लालच और पैसे की भूख ने इन मिलावटखोरों को हैवान बना दिया है । अब किससे कहें क्या कहें ।
मुरैना जैसे शहर में नकली दुध बनाया जाता है वहां नकली मिलावटी पनीर , नकली मीलावटी मावा धड़ल्ले से आदमी बन रहा है । दिखावे के लिए पुलिस एक दो छापे लगा देती है परंतु फिर वही ढाक के तीन पात । क्यों इस महामारी का पक्का इलाज नहीं किया जाता । यह अमानुषिकता की पराकाष्ठा है । ऐसे लोगों को सरेआम , सरेराह शहर के चौराहे पर आम जनता के द्वारा सजा दी जानी चाहिए । पता नहीं कितने नौनिहाल कितने पुरुष , कितनी महिलाएं, इस मिलावट खोरी के कारण असमय मौत के मुंह में समा गए । आखिर इसका अंत कब होगा चंद रुपयों के लालच में भ्रष्टाचार के तन्त्र में लिप्त बिक जाने वाले चन्द शासकीय सेवक भी इस जघन्य अपराध में बराबरी के गुनहगार हैं , ये भी तत्काल सजा के लायक हैं ।
कोई मुकदमा नहीं , कोई जिरह नहीं , कोई गवाह पुरावे नहीं , जब मिलावटी सामान मिलावट करने की वस्तुएं है इनके गोडाउन में पाई जाती है तो यह साफ जाहिर होता है कि यह मिलावट का खतरनाक खेल खेल रहे हैं , जो समाज के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है अतः तत्काल चार्ज शीट बनाकर पन्द्रह दिनों में मुकदमे का फैसला करके इन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए । ईश्वर भी क्या करेगा जब इनका जमीर ही मर गया है । इनका जमीर , इनका अंतर्मन मन श्मशान हो चुका है । हे ईश्वर ऐसे मिलावटखोरों को , शासन के भ्रष्ट अधिकारियों को ,कानून के रखवालों , या इनकी पैरवी करने वाले वकीलों को , कभी माफ मत करना , इन्हे जीते जी रोरव नर्क की अग्नि में धीरे धीरे स्वाहा करना ।
किस खाद्य वस्तु में मिलावट नहीं की जाती
मसालों में मिलावट , जीवन रक्षक दवाओं में मिलावट , मेहन्दी , सोन्दर्य प्रसाधनों में मिलावट , दुध , दुध से बने पदार्थों में मिलावट , देशीविदेशी शराब में मिलावट , वो कोनसी वस्तु है जो मिलावट रहित बची हो ।
इस मिलावट के दौर में इन्सानों की बस्ती में रहने वाले इन्सान भी मिलावटी , दोगले चरित्र वाले , कपटी , झूठे और स्वार्थी हो गयें हैं ।
हे ईश्वर तू अगर हैं तो इन्सानियत का समूल विनाश होने से बचा लेना ।
चन्द्रशेखर बिरथरे ' पथिक'
मिलावटों के जहर
ReplyDeleteमिलावटखोरों की कौम इन्सानी कौम पर एक काला धब्बा है , गन्दे और कुत्सित व्यापार के नाम पर मौत बांटने वाले यह लोग सीधे फांसी पर चढ़ाए जाने चाहिए । हमारे शासन के पास मिलावटी वस्तुओं की जांच करने के लिए कोई वैज्ञानिक सम्मत विश्वसनीय लैबोरेट्रीयां नहीं है और जांच में भी सालों साल लग जाते हैं और मिलावटखोर कानून के पंजे से बच जाते हैं । मिलावटखोरों ने भी हद कर दी है , बच्चों के द्वारा खाई जाने वाली आलू की चिप्स में भी एसिड की मिलावट । लालच और पैसे की भूख ने इन मिलावटखोरों को हैवान बना दिया है । अब किससे कहें क्या कहें ।
मुरैना जैसे शहर में नकली दुध बनाया जाता है वहां नकली मिलावटी पनीर , नकली मीलावटी मावा धड़ल्ले से आदमी बन रहा है । दिखावे के लिए पुलिस एक दो छापे लगा देती है परंतु फिर वही ढाक के तीन पात । क्यों इस महामारी का पक्का इलाज नहीं किया जाता । यह अमानुषिकता की पराकाष्ठा है । ऐसे लोगों को सरेआम , सरेराह शहर के चौराहे पर आम जनता के द्वारा सजा दी जानी चाहिए । पता नहीं कितने नौनिहाल कितने पुरुष , कितनी महिलाएं, इस मिलावट खोरी के कारण असमय मौत के मुंह में समा गए । आखिर इसका अंत कब होगा चंद रुपयों के लालच में भ्रष्टाचार के तन्त्र में लिप्त बिक जाने वाले चन्द शासकीय सेवक भी इस जघन्य अपराध में बराबरी के गुनहगार हैं , ये भी तत्काल सजा के लायक हैं ।
कोई मुकदमा नहीं , कोई जिरह नहीं , कोई गवाह पुरावे नहीं , जब मिलावटी सामान मिलावट करने की वस्तुएं है इनके गोडाउन में पाई जाती है तो यह साफ जाहिर होता है कि यह मिलावट का खतरनाक खेल खेल रहे हैं , जो समाज के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक है अतः तत्काल चार्ज शीट बनाकर पन्द्रह दिनों में मुकदमे का फैसला करके इन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए । ईश्वर भी क्या करेगा जब इनका जमीर ही मर गया है । इनका जमीर , इनका अंतर्मन मन श्मशान हो चुका है । हे ईश्वर ऐसे मिलावटखोरों को , शासन के भ्रष्ट अधिकारियों को ,कानून के रखवालों , या इनकी पैरवी करने वाले वकीलों को , कभी माफ मत करना , इन्हे जीते जी रोरव नर्क की अग्नि में धीरे धीरे स्वाहा करना ।
किस खाद्य वस्तु में मिलावट नहीं की जाती
मसालों में मिलावट , जीवन रक्षक दवाओं में मिलावट , मेहन्दी , सोन्दर्य प्रसाधनों में मिलावट , दुध , दुध से बने पदार्थों में मिलावट , देशीविदेशी शराब में मिलावट , वो कोनसी वस्तु है जो मिलावट रहित बची हो ।
इस मिलावट के दौर में इन्सानों की बस्ती में रहने वाले इन्सान भी मिलावटी , दोगले चरित्र वाले , कपटी , झूठे और स्वार्थी हो गयें हैं ।
हे ईश्वर तू अगर हैं तो इन्सानियत का समूल विनाश होने से बचा लेना ।
चन्द्रशेखर बिरथरे ' पथिक'