Samiksha
फिल्म "छलांग " एक ब्लेक कामेडी फिल्म है जो दिनांक 13 नवम्बर 2020 के दिन प्राईम विडियो ओटीटी पर रिलिज हुई । यह एक बेहतरीन फिल्म है इसे परिवार सहित देखा जा सकता है ।फिल्म में बच्चों को खेल शिक्षा भी दीए जाने पर जोर दिया गया है ।
कहानी का एंबियांस है हरियाणा का झज्जर शहर जहां एक हायर सेकेंडरी स्कूल है इसमें एक गेम्स टीचर है जिसका नाम है महेंद्र (राजकुमार राव) प्यार से जिसे सब मोन्टू कहते हैं , हालांकि मोंटू की शिक्षा इसी स्कूल में हुई और स्कूल के प्रिंसिपल श्रीमती उषा गहलोत ( इला अरुण)उसके प्रति विशेष स्नेह रखती है । मोंटू के पिता जो एक वकील (सतीश कौशिक) हैं के कहने पर या की सिफारिश पर उसे गेम्स टीचर की.नौकरी पर रख लिया जाता है हालांकि मोंटू एक एथलीट्स है और शहर के लिए कहें या स्टेट के लिए दौड़ा भी है और पुरस्कृत भी किया गया है । स्कूल में मोंटू अपने हिसाब से अपने ज्ञान से बच्चों को फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं और गेम्स वगैरह सिखाते हैं परंतु उनके पास कोई वोकेशनल क्वालिफिकेशन नहीं है इसी दरमियान स्कूल में शहर की एक लड़की नीलम (नुशरत भरुचा) का कम्प्यूटर शिक्षक के पद पर अपॉइंटमेंट होता है । महेन्द्र और नीलम एक दुसरे को दिल दे बैठते है ।चूंकि स्कूल सेमी सरकारी स्कूल है अतः ग्रांट मिलने में सरकार के द्वारा एक शर्त डाली जाती है कि अगर कोई क्वालिफाइड फिजिकल इंस्ट्रक्टर नहीं होगा तो स्कूल को दी जाने वाली सरकारी सहायता बंद कर दी जाएगी । फिर कहानी में ट्विस्ट आता है और सिंह साहब (मोहम्मद अयूब जीशान) की एंट्री होती है , वह एक क्वालिफाइड फिजिकल इंस्ट्रक्टर हैं अत: महेंद्र को उनके हाथ के नीचे काम करने को कहा जाता है जो महेंद्र को नागवार गुजरता है उसके बाद कहानी आगे बढ़ती है सिंह सर और महेंद्र मोंटू के बीच ब्च्चों की स्पर्धा आयोजित की जाती है । किस प्रकार मोंटू अपने सीमित ज्ञान के बावजूद बाजी मार ले जाता है इस के लिए फिल्म देखी जानी चाहिए ।
फिल्म का डायरेक्शन हंसल मेहता ने दिया है फिल्म के प्रोड्यूसर हैं अजय देवगन , लव रंजन , अंकुर गर्ग , भूषण कुमार और इस फिल्म को लिखा गया है लव रंजन , असीम अरोड़ा और जीशान कादरी के द्वारा । फिल्म में संगीत दिया है हितेश सोनी और गुरु ने हालाकी दो गाने ही फिल्म में है जिसे यो यो सिहं ने गाया है ।
कहानी बहुत साधारण है परंतु अच्छे डायरेक्शन और लेखन के फलस्वरुप फिल्म अच्छी बन पड़ी है ।( नुशरत भरुचा )नीलम की उपस्थिति बहुत कम दर्शाई गई है परंतु फिर भी अपने प्यार को पा लेने और जीत लेने की जो लगन की प्रेरणा वो ही मोन्टु को देती हैं ।
शौरभ शुक्ला (शुक्ला सर ) हिन्दी के अध्यापक है और मोन्टू के किरायेदार है ।
हालांकि शौरभ शुक्ला और सतीस कौशिक (वकील साहब) मोन्टू के पिता के किरदार बहुत छोटे परन्तु ये दोनों कहानी को अंजाम तक ले जाते हैं ।
फिल्म के छायांकार इशित नारायण का छायांकन कमाल का है । फिल्म के एडीटर हैं एकिव अली ।
हरियाणा में लड़का- लड़की पहली मुलाकात में ही मदिरापान करते हैं ऐसा फिल्म में बताया गया है , कहां तक उचित है ?
साथ ही फिल्म के एक दृश्य में अपनी होने वाली बहू और अपने स्वयं के बेटे के साथ ससुर खुद मुजरा पान करें यह भी न उचित प्रतीत नहीं होता ।
पिछली कई फिल्मों उदाहरण के लिए जैसे बरेली की बर्फी में पिता की सिगरेट को लड़की के द्वारा पीना ,अपने बायफ्रेन्ड के साथ खुलेआम मदिरापान करना दिखाना क्या हमारी भारतीय संस्कृति के बिलकुल विपरीत नहीं है ? ऐसी लजाने वाली आधुनिकता से तो परंपरावादी हो नहीं अच्छा है ।
चन्द्रशेखर बिरथरे 'पथिक'

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