ताजमहल हमारी एक सांस्कृतिक विरासत है चाहे उसे एक मुस्लिम सुल्तान ने बनवाया था ताजमहल हिंदुस्तान की पहचान है इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि ताज महल मोहब्बत की निशानी है । 

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  1. अगर आप प्रबंधन सीखना चाहते हैं तो गृह लक्ष्मी से अच्छी प्रबंधनकर्ता आपको ढूंढे नहीं मिलेगी । गृह लक्ष्मी का प्रबंधन वाकई काबिले तारीफ है वह घर की प्रधानमंत्री भी है , वित्त मंत्री भी है विपणन मंत्री भी है और साथ ही वह घर की विदेश मंत्री भी है इन सारे मंत्रालयों को संभालने का काम व स्वयं अकेले ही करती है । घर की सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के बाद बची हुई धनराशि का वह समुचित संयोजन इस प्रकार करती है कि जब भी पतिदेव या बच्चों को धन की आवश्यकता होती है तो वह इस मद में से पैसा निकाल कर उन्हें उनकी आवश्यकताएं पूरी करने को धन उपलब्ध करवा देती है साथ ही जब कभी घर में चाय शक्कर इत्यादि खत्म होती है तो वह बतौर विदेश मंत्री की हैसियत से तत्काल पड़ोसी गृह लक्ष्मी से इन वस्तुओं का आदान प्रदान करती है और समय पर इन्हें लौटा भी देती है । वह एक लंबी योजना के तहत बच्चों के शादी ब्याह एवं अन्य इसी प्रकार के प्रसंगों के लिए भी उचित धनराशि बचत स्वरूप अपने पास रखती है । साथ ही घर के भंडारण में विभिन्न वस्तुओं का स्टाक (मटेरियल मेनेजमेंट) , कब कम दाम पर खरीदना और साल भर या महीनों के हिसाब से संग्रह करना वह बखूबी जानती है । मैं समझता हूं घर की गृह लक्ष्मी से अच्छा प्रबंधक कोई नहीं हो सकता है । इति शुभम

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  2. अगर आप प्रबंधन सीखना चाहते हैं तो गृह लक्ष्मी से अच्छी प्रबंधनकर्ता आपको ढूंढे नहीं मिलेगी । गृह लक्ष्मी का प्रबंधन वाकई काबिले तारीफ है वह घर की प्रधानमंत्री भी है , वित्त मंत्री भी है विपणन मंत्री भी है और साथ ही वह घर की विदेश मंत्री भी है इन सारे मंत्रालयों को संभालने का काम व स्वयं अकेले ही करती है । घर की सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के बाद बची हुई धनराशि का वह समुचित संयोजन इस प्रकार करती है कि जब भी पतिदेव या बच्चों को धन की आवश्यकता होती है तो वह इस मद में से पैसा निकाल कर उन्हें उनकी आवश्यकताएं पूरी करने को धन उपलब्ध करवा देती है साथ ही जब कभी घर में चाय शक्कर इत्यादि खत्म होती है तो वह बतौर विदेश मंत्री की हैसियत से तत्काल पड़ोसी गृह लक्ष्मी से इन वस्तुओं का आदान प्रदान करती है और समय पर इन्हें लौटा भी देती है । वह एक लंबी योजना के तहत बच्चों के शादी ब्याह एवं अन्य इसी प्रकार के प्रसंगों के लिए भी उचित धनराशि बचत स्वरूप अपने पास रखती है । साथ ही घर के भंडारण में विभिन्न वस्तुओं का स्टाक (मटेरियल मेनेजमेंट) , कब कम दाम पर खरीदना और साल भर या महीनों के हिसाब से संग्रह करना वह बखूबी जानती है । मैं समझता हूं घर की गृह लक्ष्मी से अच्छा प्रबंधक कोई नहीं हो सकता है । इति शुभम

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  3. मेरे वजूद का तू एहतराम तो कर ,
    मैं अभी जिन्दा हूं सलाम तो कर ।
    मैं बेवफा तो कभी हो न सका ,
    बेवफा कह मुझे बदनाम तो कर ।

    मुफलिसी में भी कलंदर हैं हम ,
    दरिया होकर भी समंदर है हम ,
    दिलों को जीतने का हुनर जानते हैं ,
    इस न ए दौर के सिकंदर हैं हम ।

    मेरे हिस्से की तू खुशी ले ले ,
    तेरे हिस्से के गम मुझे दे दे ।
    जिन्दगी नाम है बस देने का ,
    गर तू चाहे तो जिन्दगी ले ले ।

    सियासत एक बड़ा संगीन खेल होती है ,
    सियासत कपट का धूर्तता का मेल होती है ,
    सियासत में रकीब भी हबीब हो जाते हैं ,
    ये वो शै है जो कि द्रौपदी की तरह ,
    सरे बाजार , हर चौराहे पे सेल होती है ,


    घोषणा-उदघोषणाएं हो रही है ,
    देश की जनता मगर अब रो रही है ।
    छीन कर मुंह का निवाला कह रहें हैं ,
    आम जनता पेट भर कर सो रही है ।

    बदल बदल के वो किरदार
    मुझ से मिलता है
    उसकी फितरत में कई गिरगिट
    नजर आते हैं मुझे ।

    फना तो होन्गे मगर तुमसे दूर होन्गे नही
    आजमा लेना जब जी चाहे बुलाकर हमको ।
    -------

    कान्टो की दोस्ती ने हमको सिखाया है
    अपने लहू से सीन्च कर गुल कैसे खिलते है ।

    यहां बारिशों में जलते हैं गरीबों के घर ,
    और अन्धेरा रोशनी को निगल जाता है ।

    कहां से चले थे कहां आ गये हम
    गुमनाम अंघेरों की सजा पा गए हम
    हमने पलकों पे सजाया था हसीं सपनो को
    और सपनों ने ठगा तो कजा पा गए हम ।

    खुद पर मुस्कुराता हूं बहुत
    दर्द अपना छुपाता हूं बहुत
    यू नजर आता हूं खामोश मगर
    जेहन में चीखता चिल्लाता हूं बहुत ।

    नाचता गाता हूं इठलाता हूं
    जश्न जीवन का यूं मनाता हूं
    जिनके हिस्से में आंसू आए हैं
    उनके होठों पर हंसी लाता हूं

    खुश रहिए खुद औरों को भी खुशियां लुटाईये ,
    लुत्फे जिंदगानी पूरा उठाइए ,
    जिंदगी की रेत के मरुस्थल में ,
    कोशिशों से अपनी गुलिस्तां उगाइए ।

    मुस्कुराना चाहिए गुनगुनाना चाहिए ,
    जिंदगी के गीत को जम के गाना चाहिए ,
    मुश्किलें हो अनगिनत ,
    दुश्वारियां हो बेशुमार ,
    दर्द की अठखेलियाँ हो ,
    आंसुओं की हो बहार ,
    फिर भी होठों पर ,
    हर बार लाना चाहिए ।

    छांव में है धूप की तू बात कर ,
    गर है गम तो तू खुशी की बात कर ,
    जिन्दगी तो है गमों का एक पहाड़ ,
    तू गमों को काट पुल की बात कर ।
    तेरे जैसे और भी है गमजदा ,
    ले गम उनके दे खुशी की बात कर ।

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