प्रवासी मजदूरों का दर्द
हजारों हजार मजदूर और उनके परिवार अपने पैतृक घरों की ओर लौट रहे हैं । उनकी यातनाओं ओंर उनकी विषमताओं और उनके दर्द को कौन महसूस कर रहा है । राज्य सरकारें अपना दामन बचा रही है , केंद्र सरकार है उनके हिस्से का अनाज और अन्य वस्तुएं राज्य सरकारों को दे रही हैं पर फिर क्यों इन मजदूरों को उनका हक मिल नहीं पा रहा है । अगर उन्हें समुचित अनाज भोजन आदि मिले तो वे क्यों कर अपना ठिया छोड़ेंगे , क्यों कर अपनी रोजी-रोटी छोड़ कर वापस अपने मुल्क जाना पसंद करेंगे । झोल कहां हैं देखना चाहिए घोषणाएं बहुत हो रही है पर क्या उसका लाभ अंतिम व्यक्ति को मिल रहा है । जो भी उपक्रम राज्य सरकार या केंद्र सरकार कर रही है वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है हजारों हजार बसों का इंतजाम कर देने के बाद भी बहुत सारी ट्रेनें चला देने के बाद भी ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इन मजदूरों को अपने गांव जाने का मौका मिल पाएगा बताया जा रहा है कि करीब 100 से ज्यादा मजदूर अपने घर लौटने के प्रयास में मृत्यु को गले लगा चुके हैं । सड़क दुर्घटनाएं रोज ही हो रही हैं दसियों मजदूर सड़क दुर्घटना में काल कवलित हो रहे हैं । पता नहीं कब वे अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचकर निरात से अपनी मां की गोद में या अपने परिवार के साथ मर सकेंगे । प्रश्नों की श्रृंखला बहुत लंबी है और उत्तर कहीं भी नहीं मिल रहा है ।
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