लाक डाउन में क्या करें

वर्तमान में जो विकट स्थितियां भारतवर्ष में या निखिल विश्व में व्याप्त है उनसे निपटने के लिए हर व्यक्ति की सोच सकारात्मक होनी चाहिए । मुसीबतें , परेशानियां , बीमारी , महामारी इन सभी का सामना करने के लिए प्रबल आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है । वर्तमान में प्रचलित चिकित्सा प्रणालियों में किस पर विश्वास किया जाए , किस पर नहीं यह सोचनीय है परंतु अभी हम एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति पर ही विश्वास कर रहे हैं जिसके सकारात्मक परिणाम हमें या देश की जनता को मिल रहे हैं , परंतु फिर भी हमारे समाज में प्रचलित हल्दी के उपयोग , गर्म पानी के उपयोग आदि से भी इस महामारी से लड़ा जा सकता है । वैसे तो हमारे रसोई कक्ष में हम कई प्रकार के मसालों का उपयोग करते हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से हमारे स्वास्थ्य को सही रखते हैं परंतु फिर भी ऐसा माना जा रहा है कि आयुर्वेद चिकित्सा या यूनानी चिकित्सा से भी इस बीमारी से लड़ा जा सकता है परन्तु चिकित्सक अनुभवी होना चाहिये । फिर भी कोई सटीक और उचित इलाज की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है ।
सामूहिक प्रार्थना की शक्ति और विश्वास की ताकत से ही चमत्कार होते हैं हमें अपना आत्म बल बनाए रखना है

लाकडाउन के समय का सदुपयोग कैसे किया जाए इस बाबत भी कई भ्रांतियां मन में उत्पन्न होती है परंतु फिर भी मन को साधने के लिए , तन को साधने के लिए प्राणायाम , योग आदि नित्य प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक किए जाना चाहिए और इसके अलावा प्रतिदिन 30 मिनट की तेज चाल से चलना चाहिए ।

स्वयं को भूतकाल की कड़वी स्मृतियों से बचा कर रखना चाहिए साथ ही भविष्य के प्रति आश्वस्त रहना चाहिए । वर्तमान ही सब कुछ है वर्तमान में जीना ही जीवन है । इसलिए स्वयं को वर्तमान में स्थानांतरित करें मैं इन दिनों एक किताब पढ़ रहा हूं जिसे एक एकहार्ट टो
ले ने लिखी है जिसका नाम है Power of Now
यह बहुत अद्भुत किताब है इस किताब में बताया गया है कि ( Time)समय और मन (Mind)
दोनों ही भ्रम है । समय और मन के द्वारा हम दिग्भ्रमित होते हैं समय के भ्रम को तोड़ने के लिए हमें सर्वदा वर्तमान में ही रहने का प्रयत्न करना चाहिए जहां तक मन या दिमाग या माइंड की बात है तो यह भी एक प्रकार का इल्यूजन है । मानव मन , दिमाग एक सुपर कंप्यूटर है जिसमें हमारे जीवन की से जुड़ी हुई सभी प्रकार के अनुभव , हमारी ज्ञानेंद्रियों से प्राप्त अनुभव आदि आदि का लेखा जोखा होता है वास्तव में माइंड नाम की कोई चीज नहीं होती है हमारा जो यह मन है यही हमारे अहंकार के होने का प्रमाण है अतः जैसे ही हम मन से और समय से अलग होते हैं हम स्वयं को वर्तमान में पाते हैं और हमें एक नए अनुभव की प्राप्ति होती है ।

इसके बाद आप चाहें तो घर में रखे हुए धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर सकते हैं पिछले दिनों मैंने गीता के दूसरे अध्याय का लगाता पठन-पाठन किया जिससे मुझे काफी सकारात्मक उर्जा मिली और अगर आप चाहे तो सभी तरह के पुराण भी जो गूगल पर उपलब्ध हैं उनका भी अध्ययन कर सकतें हैं । कुछ समय मगर निर्धारित समय के लिए आप अपने आप को टीवी पर भी व्यस्त रख सकते हैं । आपके पास अगर स्मार्ट मोबाइल है तो भी आधे से एक घंटा उसमें व्यस्त रह सकते हैं ।
आपका जो भी शौक हो उसे भी पूरा करने के लिए यह समय बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है ।
आप भाषण कला सीख सकते हैं , आप वार्तालाप की आंग्ल भाषा में पारंगतता प्राप्त कर सकते हैं आप अन्य भाषा जैसे मराठी , गुजराती , बंगाली भी सीख सकते हैं । इस तरह जब आपके मस्तिष्क को आप थोड़ा नया अथवा कठिन चुनौती देगें तो निश्चय ही आप समय को आनंद स्वरूप बना सकेगें । आप भोजन बनाना सीख सकते है ।
आप स्वयं का SWOT एनालिसिस कर सकते हैं जिसमें जो भी आपकी ( Strenth )ताकत है उसके द्वारा आपको क्या अवसर( opportunities) प्राप्त हो सकते हैं और जो भी आपकी (Weekness)कमजोरियां हैं उन के कारण जो डर या भय , कमियां आपके व्यक्तित्व में व्याप्त है उनसे आप स्वयं को कैसे निजात दिला सकते हैं ।
चन्द्रशेखर बिरथरे
एक पथिक ।

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