यूपी के उन्नाव शहर के भाजपा के विधायक सेगंर ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी उसने न सिर्फ बलात्कार से पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट में फंसाया बल्कि पीड़िता की चाची , प्री मौसी और पीड़िता के वकील की कार को ट्रक से एक्सीडेंट करवा कर पीड़िता के वकील, मौसी, चाची की सरेआम हत्या करवा दी और एक्सिडेंट में पिडिता को इतनी चोटें पहुंची है कि वह शायद जिन्दा लौट न पाए इतना सब कुछ होने के बावजूद भी विगत दो दिन पहले ही भाजपा ने इस नराधम विधायक को पार्टी से निष्कासित किया । जेल में बैठा बैठा यह बाहुबली विधायक अपने काले कारनामों को अंजाम देता रहा और अंततः पीड़िता की जान पर बन आई । पिडिता के पूरे परिवार को उसने नेस्तनाबूद कर दिया , बर्बाद कर दिया अब ऐसे में इस देश में लाचार , गरीब कन्या उनके साथ हुए अन्याय के लिए किस से उम्मीद रखें पीड़िता की न्याय मांगने की सहायता मांगने की चिट्ठी को पुलिस प्रशासन ने दबा दिया कुल मिलाकर इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश की पुलिस उत्तर प्रदेश के प्रशासन की व्यवस्था की पोल खुलती रही है ताज्जुब होता है आदरणीय योगी जैसे लायक शासक के द्वारा भी ऐसी भूले क्यों हुई अंततः सारे पांचों मामले को सुप्रीम कोर्ट ने अपने संज्ञान में लेकर सीबीआई को जांच सौंप कर प्रकरण को 45 दिन में निपटाने का निर्णय लिया है जो सराहनीय है विधायक सांसद के द्वारा प्रशासन का अनुचित उपयोग कब तक होता रहेगा यह विचारणीय है
प्रवासी मजदूर
ब्लाग कितने दुख , कष्ट और मानसिक पीड़ा की बात है कि फिर एक साल बाद कोविड के प्रकोप के कारण लाकडाउन होने से प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने लगे हैं थोड़ी सी राहत की बात यह है कि वे पैदल नहीं जा रहे हैं बल्कि उन्हें जो भी यात्रा का साधन मिल रहा है उससे वे घर लौट रहे हैं परंतु हो सकता है आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो जाए पिछली बार भी मैंने यह सुझाव दिया था कि प्रवासी मजदूरों को रहने के लिए स्थान मुहैया करवाया जाना चाहिए वे जिस भी फैक्ट्री में , कारखाने में या दुकानों में काम करते हैं उनके मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे प्रवासी मजदूरों को रहने की जगह उपलब्ध करवाएं परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ और जब मजदूरों को लगा कि रहने की बात तो छोड़ो उनके खाने-पीने की भी कोई व्यवस्था नहीं हो रही है तो वे दुखी मन से अपने गांव या घर लौटना चाह रहे हैं । यह बहुत ही चिंता का विषय है। आज भी रोजनदारी पर काम करने वाले मजदूर लावारिस ही हैं हम भले ही प्रोविडेंट फंड या ईएसआईसी की योजना देश में चला रहे हैं लेकिन धरातल पर ऐसी व्यवस्थाएं क्यों नहीं है यहां तक की रोजनदारी पर मकान बनाने के काम करने करवाने वाला ठेकेदार ...
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