Happy and simple
राजेश खन्ना द्वारा अभिनीत बावर्ची फिल्म एक डायलॉग था it is very simple to become so happy but it is very difficult to become so simple (यह आंग्ल भाषा की एक लोकोक्ती भी है ) , का अगर हिंदी में अर्थ करें तो अर्थ होता है कि खुश होना एक सीधी-साधी बात है परंतु सरल होना एक बहुत कठिन बात है अब हमें यह तय करना है कि हम खुश होने में ही खुश हैं या सरल होकर खुश हो सकते हैं हालांकि यह बहुत ही कठिन है क्योंकि हमारा अहंकार यानी मैं यानी जो भी आपका विश्व में नाम है और जो भी आपने पढ़ा लिखा समझा सोचा और जीवन में प्राप्त किया है उससे निश्चय ही अहंकार का भाव आपके अंदर पैदा हो जाता है और अहंकार से मुक्त होना बहुत ही कठिन है इसलिए साधारणतया व्यक्ति सरल नहीं हो पाता है जबकि जो भी आपने इस विश्व में आपके प्रयासों से आपके प्रयत्नों से प्राप्त किया है वह निश्चय ही अस्थाई एवं परिवर्तनशील है इसलिए सरल होना बहुत कठिन है । सरलता सहजता को आज के परिवेश में व्यक्ति की बेवकूफी से भी जोड़ा जाता है व्यक्ति की नादानी और व्यवहारिक समझ के कम होने से भी जोड़ा जाता है ।परंतु जब आप सहज हो जाते हैं तो स्वाभाविक हो जाते हैं , और जब आप स्वाभाविक हो जाते हैं तो निश्चित रुप से आप से कोई गलती या किसी मानव के प्रति दुर्भावना या ठेस पहुंचाने वाले व्यवहार की स्थिति नहीं बनती और यही स्थिति हमें भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहे अनुसार धार्मिक बनाती है । जैसे तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में कहा है कि परहित सरिस धर्म नहीं भाई परपीड़ा सम नहीं अधमाई जिसके अनुसार परहित जैसा कोई धर्म नहीं है और परपीड़ा जैसी जैसा कोई अधर्म नहीं है परंतु कुछ लोगों की धारणा है कि व्यापार में झूठ बोलना जरूरी है असहज होना जरूरी है तब ही मुनाफा कमाया जा सकता है परंतु मेरा यह मानना है व्यापार हो या जीवन की कोई भी परिस्थिति हो घटना , जब भी आप किसी को ठगने की कोशिश करते हैं तो आप स्वयं को ठगते हैं , आप स्वयं को धोखा देते हैं और वह धोखा या आपके द्वारा की जा रही ठगी जीवन में आपको बहुत पीछे ले जाती है इसलिए मैं समझता हूं सहज होना सरल होना ईश्वर की पूजा के समान है ।
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