आज जब मैं प्रतीक स्वरूप गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहा था तो मन मैं विचार आया कि वेदों के बाद भगवान श्री कृष्ण दुनिया के सबसे पहले पर्यावरणविद थे जिन्होंने पर्वतों और जंगलों , नदियों की अति महत्वपूर्ण जीवन दायिनी शक्ति के रूप को प्राणी मात्र को समझाने की कोशिश की । जय हो गोवर्धन गिरिधारी की चन्द्रशेखर बिरथरे
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एकता
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पहले के हाथ में खंजर था , दूसरे के हाथ में देसी तमंचा , पहले के खंजर ने दूसरे की , छाती के मान्स का स्वाद चखा । दूसरे के देशी तमंचे की गोली ने पहले की , छाती में छेद किया , दोनों धराशाई होकर गिर पड़े । बस्ती वीरान हो गई । अब न वहां मस्जिद में नमाज होती है ना मंदिर में घंटियां बजती है । चन्द्रशेखर बिरथरे