लावारिस प्रवासी मजदूर
कई मजदूर और उनके परिवार जो मुंबई में निवास करते थे और वहां अपने किए हुए काम से रोजी रोटी कमाते थे सुबह जब इंदौर में एक थोड़ी देर के लिए रुके जहां उन्हें चाय नाश्ता भोजन करवाया गया और आगे मार्ग के लिए भी चप्पले , दवाइयां दी गई । यह मालवा है और इन्दौर तो मानवता की सेवा हेतु सदैव अग्रणी रहा है और रहेगा । यह मध्य प्रदेश है जहां की जनता बहुत दयालु है , और कई एनजीओ यहां कार्यरत है । होना तो यह चाहिए था कि हर स्टेट महाराष्ट्र से आगे की सारी स्टेट्स हर 100 किलोमीटर पर एक भोजन सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए स्टाल लगा देतीं तो इन मजदूरों की मृत्यु का आकंड़ा कम होता । करीब 100 से ज्यादा प्रवासी मजदूर घर लौटने के प्रयासों में असमय काल का ग्रास बन चुके हैं । सड़क दुर्घटना में मरे हुए मजदूरों का आंकड़ा अलग है । खैर जो हुआ सो हुआ पर आश्चर्य की बात यह है कि इन मजदूरों ने बताया कि उनके साथ मुंबई में और महाराष्ट्र के रास्तों पर बहुत ही अपमानजनक और रुखा व्यवहार किया गया । किसी भी गांव में , किसी भी शहर में उनके प्रवास में होने वाली असुविधाओं , परेशानियों को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया , बल्क...