मेरी व्यथा कथा
मेरी व्यथा कथा मैं अपने आप से लगातार मिलने की कोशिश कर रहा हूं मगर मजाल है जो मुझ से मेरी मुलाकात हो जाए । लगता तो है मुझे खुद मेरी तलाश है मगर पता नहीं क्यों खुद से मुलाकात नहीं कर पाता । दिन भर पता नहीं चाहते हुए भी न कुछ लिख पाता हूं , ना कुछ पढ़ पाता हूं । बेवजह टीवी के सामने बैठकर हर 30 सेकंड में चैनल बदलता हूं । मन बहुत व्यथित है । पीड़ा बहुत गहन हैं । परंतु फिर भी दोनों समय पेट भर कर खाता हूं और दोपहर में एक-दो घंटे सो जाता हूं फिर शाम की चाय पीकर टीवी देखता हूं , और कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या में इजाफा होते सुनता हूं , देखता रहता हूं । देखता हूं वायरल वीडियो जिसमें डॉक्टरों पर , नर्सों पर पत्थर फेंकने वालों को दिखाया जाता है । देखता रहता हूं एक या दो दिन के अंतराल में कोरोना के कारण मृत्यु को गले लगाते हुए डॉक्टर्स , नर्सों को । कोरोना कभी किसी को नहीं छोड़ता , वह जात या पात नहीं देखता । पता नहीं क्यों हम इतने सांप्रदायिक हो गए हैं कि छोटी छोटी बातों को भी नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं । लाकडाउन के कारण लोग भूखे मर रहे हैं । दिहाड़ी मजदूर जिन्हें अनाज मिलना था , रा...