उन्नाव प्रकरण

यूपी के उन्नाव शहर के अपराधी विधायक के द्वारा जितने भी कुकृत्यों  को अंजाम दिया गया जिसके द्वारा इस अपराधी विधायक ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी । इसने न सिर्फ पीड़िता के साथ दुराचार , बलात्कार , कदाचार किया ,परंतु उसके पिता को भी झूठे आर्म्स एक्ट में फंसा कर जेल भिजवाया और पिता ने अंततः आत्महत्या कर ली । अब जेल में बैठा बैठा यह विधायक अपने काले कारनामों को अंजाम देता रहा और पीड़िता समेत उसके वकील उसकी मौसी उसकी चाची जिस कार में बैठी हुई थी उस कार का षडयंत्र पूर्वक एक्सीडेंट करवा दिया गया ।  पीड़िता ने एक्सीडेंट के पहले पीड़िता ने एक प्रार्थना पत्र न्यायालय में दिया था जिसमें उसने पुलिस सुरक्षा की प्रार्थना की थी परंतु पीड़िता को पुलिस सुरक्षा तो प्रदान की गई पर पुलिस ने भी पिडिता की रक्षा के लिए कोई उचित इंतजाम नहीं किए जिसके फलस्वरूप अंतत:  पीड़िता के परिवार के दो सदस्यों एवं पिडिता  के वकील को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और पीड़िता गंभीर रूप से घायल हुई । इस एक्सीडेंट के बाद भाजपा ने इस नाकारा , नराधम विधायक को पार्टी से निष्कासित किया ।इस बाहुबली विधायक ने अपने मनचाहे एवं बर्बरता पूर्वक तरीक़े से पूरे परिवार को नेस्तनाबूद कर दिया ।अब इस मामले में सीबीआई जांच की जा रही है सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले  की सुनवाई दिल्ली में करने का निर्णय लिया है सारे 5 मामले अब दिल्ली में सुनवाई किए जाकर 45 दिनों की अवधि में निर्णय दिया जाएगा । पीड़िता आज भी अस्पताल में मृत्यु   से जूझ रही है ।

 इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश पुलिस की लापरवाही एवं प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही है । पुलिस ने सरकारी दबाव में पूरे मामले में विधायक जी का साथ दिया है हालांकि विधायक  अभी जेल में है परंतु फिर भी भाजपा पार्टी का पूरा सहयोग उनके साथ है । इस तरह अगर देखा जाए तो गरीब घर की बहू बेटियों सामान्य वर्ग की लड़कियों के लिए यह चिंतनीय है कि वह कहां जाकर अपने साथ अन्याय के लिए गुहार लगाएं देश में पूर्व में भी इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी है अब यह चिंतनीय है कि महिलाएं युवतियां अपने साथ हुए दुराचार कदाचार के लिए किसे पुकारे और क्या देश में इनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है

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